सृष्टि क्या है ? सृष्टि का प्रारंभ कहाँ से हुआ ? जीवन की खोज  - by Aman Singh - CollectLo

सृष्टि क्या है ? सृष्टि का प्रारंभ कहाँ से हुआ ? जीवन की खोज

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Aman Singh

Content Writer . Hire Me

3 min read . Dec 26 2025

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सवाल अब मुझ तक सीमित नहीं रहा

पहले सवाल ने मुझे यहाँ तक पहुँचाया था—

“मैं कहाँ से आया?” 

लेकिन उस सवाल ने मुझे यह भी समझा दिया कि मैं अकेला नहीं हूँ।

मेरे जैसे अनगिनत लोग हैं। और सिर्फ लोग ही नहीं—

  • पेड़ हैं
  • जानवर हैं
  • नदियाँ हैं
  • पहाड़ हैं
  • धरती है
  • आकाश है

अब सवाल अपने-आप बड़ा हो गया।

अब मन यह नहीं पूछ रहा था कि— ❌ मैं कहाँ से आया?

अब मन पूछ रहा था— सृष्टि क्या है?  और यह सृष्टि शुरू कहाँ से हुई?

सृष्टि क्या है — सिर्फ दुनिया या कुछ और?

आमतौर पर हम सृष्टि को कहते हैं—

  • दुनिया
  • प्रकृति
  • जीवन
  • ब्रह्मांड

लेकिन जब ध्यान से देखा, तो समझ में आया कि— सृष्टि सिर्फ चीज़ों का नाम नहीं है। सृष्टि एक चलती हुई प्रक्रिया है।

  • जन्म होता है
  • जीवन आगे बढ़ता है
  • मृत्यु होती है
  • फिर नया जन्म होता है

यह क्रम लगातार चलता रहता है।  यही पूरा क्रम “सृष्टि” है।

क्या सृष्टि एक बार बनी थी?

यहीं मन ने अगला सवाल उठाया— क्या सृष्टि एक बार बनी थी?

क्या कभी ऐसा समय था जब—

  • कुछ भी नहीं था
  • न जीवन
  • न धरती
  • न आकाश

और फिर अचानक सब कुछ हो गया? यह विचार सुनने में आसान लगता है, लेकिन गहराई से सोचें तो अजीब लगता है।

क्योंकि— अगर कभी सच में कुछ भी नहीं था, तो फिर कुछ आया कैसे?

कुछ नहीं से कुछ कैसे आ सकता है?

यह सवाल बहुत साधारण लगता है, लेकिन बहुत गहरा है।

अगर:

  • बिल्कुल शून्य था तो—
  • सृष्टि पैदा कैसे हुई?

यहीं पर सोच ने दिशा बदली। शायद ऐसा नहीं है कि—

  • सृष्टि “कुछ नहीं” से आई

बल्कि शायद—  सृष्टि हमेशा किसी न किसी रूप में मौजूद थी।

जो दिख रहा है, वह पूरा सच नहीं हो सकता

हमें जो दिखता है, वह यह है—

  • लोग पैदा होते हैं
  • जीवन जीते हैं
  • और एक दिन मर जाते हैं

लेकिन क्या मरने के साथ सब कुछ खत्म हो जाता है?

या फिर—

  • रूप खत्म होता है
  • लेकिन प्रक्रिया चलती रहती है?

रूप बदलना और नष्ट होना — एक जैसे नहीं

यहीं पर एक महत्वपूर्ण बात समझ में आई। उदाहरण से समझिए

सृष्टि को अगर समझना हो, तो उसे किसी किताब से नहीं, नदी को देखकर समझा जा सकता है।

नदी कहाँ से आती है?

हम कहते हैं—

नदी पहाड़ से आती है।

हम कहते हैं:

नदी पहाड़ से आती है।

लेकिन सच में देखें तो—

  • क्या पहाड़ “नदी का पहला कारण” है? ❌
  • पहाड़ से पहले क्या था?
  • बर्फ
  • बारिश
  • बादल
  • समुद्र

तो असल में: 👉 नदी का कोई एक पहला बिंदु नहीं है। वह एक चक्र का हिस्सा है।

  • समुद्र → बादल
  • बादल → बारिश
  • बारिश → बर्फ
  • बर्फ → धारा
  • धारा → नदी
  • नदी → फिर समुद्र

 हम सिर्फ एक हिस्से को नाम दे देते हैं — “यहाँ से नदी आई।” यानी नदी कोई एक पल में पैदा हुई चीज़ नहीं है। वह धीरे-धीरे बनती हुई एक प्रक्रिया है।

नदी बहती क्यों रहती है?

नदी:

  • रुकती नहीं
  • पूछती नहीं कि कहाँ जाना है
  • बस बहती रहती है

रास्ते में:

  • वह कभी शांत होती है
  • कभी उफनती है
  • कभी सूखती-सी लगती है

लेकिन जब तक नदी है, बहना उसका स्वभाव है।

नदी रास्ते में क्या करती है?

नदी रास्ते में:

  • खेतों को सींचती है
  • गाँवों को जीवन देती है
  • पेड़ों को पोषण देती है

नदी का बहना सिर्फ उसका खुद का काम नहीं होता, वह दूसरों के जीवन का कारण भी बनती है।

नदी सागर में जाकर क्या होती है?

आख़िर में नदी सागर में मिल जाती है। अब एक सवाल उठता है— क्या नदी नष्ट हो गई? ऊपर से देखने पर लगता है— हाँ, नदी खत्म हो गई। लेकिन गहराई से देखें तो—

❌ पानी नष्ट नहीं हुआ ❌ अस्तित्व खत्म नहीं हुआ

बस— नदी का अलग नाम और अलग रूप खत्म हुआ।

सागर क्या करता है?

सागर:

  • नदी को रोकता नहीं
  • नदी को मिटाता नहीं
  • नदी को बस अपने भीतर समा लेता है

नदी का पानी:

  • सागर में मिल जाता है
  • फिर वही पानी बादल बनता है
  • बारिश बनकर फिर धरती पर आता है
  • और नई नदियों का रूप ले लेता है

रूप बदलना और नष्ट होना — एक जैसे नहीं

यहीं पर एक महत्वपूर्ण बात समझ में आई। 

सृष्टि शायद नष्ट नहीं होती, वह सिर्फ अपना रूप बदलती है।

तो सृष्टि का प्रारंभ कहाँ से हुआ?

इस सवाल का सबसे ईमानदार जवाब यह है—

हम नहीं जानते कि सृष्टि का “पहला” प्रारंभ कब हुआ।

लेकिन हम यह साफ़ देख सकते हैं कि—

  • सृष्टि चल रही है
  • सृष्टि बदल रही है
  • सृष्टि रुक नहीं रही

और शायद— “पहला” जैसा कोई क्षण था ही नहीं।

सच्चाई (ध्यान से पढ़िए)

नदी का स्रोत हमें इसलिए “पता” लगता है

क्योंकि हम बीच में खड़े होकर देख रहे हैं।

सृष्टि का स्रोत हमें इसलिए “नहीं पता”

क्योंकि हम सृष्टि के अंदर खड़े हैं।

आप नदी को बाहर से देखते हैं, लेकिन सृष्टि को बाहर से देखने की कोई जगह नहीं है।

शास्त्रों की बहुत साफ़ बात

भारतीय दर्शन कहता है:

सृष्टि का कोई पहला प्रारंभ नहीं है। यह अनादि है — यानी जिसका आरंभ ज्ञात नहीं।

इसका मतलब यह नहीं कि: सृष्टि कभी बनी ही नहीं

इसका मतलब यह है कि: सृष्टि हमेशा किसी न किसी रूप में मौजूद थी।

अगले लेख में हम समझेंगे: “सृष्टि बनती और नष्ट क्यों होती है?” क्या यह नाश है या सिर्फ रूप परिवर्तन?